Friday, November 9, 2018

कर्नाटक में टीपू सुल्तान की जयंती मनाने की तैयारी में सरकार

बीजेपी के भारी विरोध के बाद भी कर्नाटक सरकार ने घोषणा की है कि वह इस वर्ष भी 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्‍तान की जयंती अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक ही मनाएगी। शनिवार को होने वाले इस कार्यक्रम के विरोध में बीजेपी और श्री राम सेना के समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं।

जहां एक ओर कर्नाटक सरकार शनिवार को मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती मनाने की तैयारी कर रही है, वहीं बीजेपी ने इसका बड़े स्तर पर विरोध शुरू कर दिया है। बीजेपी कार्यकर्ता और नेता तख्तियां लेकर बेंगलुरु में इस आयोजन के खिलाफ प्रदर्शन करने उतर चुके हैं। बता दें, कर्नाटक सरकार ने घोषणा की है कि वह बीजेपी के विरोध के बावजूद इस वर्ष भी 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्‍तान की जयंती अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक ही मनाएगी।

10 नवंबर को होने वाले इस कार्यक्रम के विरोध में बीजेपी और श्री राम सेना के समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं। बीजेपी ने मैसूर के शासक को अत्‍याचारी करार दिया है। केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने कहा है कि एक अत्‍याचारी के जन्‍मदिन को मनाए जाने की कोई जरूरत नहीं है। उन्‍होंने कहा कि टीपू सुल्‍तान हिंदू विरोधी थे। बीजेपी प्रवक्‍ता एस प्रकाश ने कहा कि जब पिछली कांग्रेस सरकार ने टीपू जयंती मनाने का फैसला किया था, उस समय उनका काफी विरोध हुआ था। 

इससे पहले येदियुरप्पा ने भी इसका विरोध करते हुए कहा था, 'हम टीपू जयंती का विरोध कर रहे हैं और कोई इस आयोजन की तारीफ नहीं करेगा। लोगों के हित में राज्य सरकार को इसे रोकना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'टीपू जयंती मनाने के पीछे सरकार की मंशा केवल मुस्लिम समुदाय को संतुष्ट करने की है।' बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी ने आने वाले दिनों में इसके व्‍यापक विरोध का फैसला किया है।

राज्‍य की एचडी कुमारस्‍वामी सरकार ने गुपचुप तरीके से इस कार्यक्रम का स्‍थल विधानसौधा से हटाकर एक गैरराजनीतिक स्‍थान पर कर दिया है। विरोध को देखते कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्‍वरा ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की है तथा कानून और व्‍यवस्‍था को बनाए रखने के लिए सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की है। मुख्‍यमंत्री एचडी कुमारस्‍वामी ने चेतावनी दी है कि यदि किसी ने आधिकारिक कार्यक्रम में बाधा डाली तो उसे कानून का सामना करना होगा।

बेंगलुरु, आठ नवंबर (भाषा) अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा से मुकाबले के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे तेलुगूदेशम पार्टी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने गुरूवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी तथा पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा से मुलाकात की। भाजपा के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे नायडू ने दावा किया कि देश का मिजाज भाजपा नीत राजग के खिलाफ है और जल्द ही कई क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन बनाया जाएगा

देवगौड़ा और कुमारस्वामी से मिलने के बाद नायडू ने संवाददाताओं से कहा कि गठबंधन बनाने के लिए शुरूआती कदम अभी तक तय नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के बाद कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। नायडू ने कहा, ‘‘मैंने मायावती, अखिलेश यादव से बातचीत की। मैंने सभी से मुलाकात की है। कल मैं द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन से मिलूंगा।

हम तय करेंगे कि आम-सहमति के साथ गठबंधन कैसे आगे ले जाया जाए। यह शुरूआती कवायद है। इसके बाद हम मिलकर काम करेंगे।’ कांग्रेस के मुखर आलोचक रहे नायडू महागठबंधन के लिए उसके साथ बातचीत करने के भी खिलाफ नहीं हैं। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री पद के दावेदार के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया।

Thursday, November 1, 2018

टिकट बंटवारे पर राहुल के सामने भिड़े दिग्विजय-सिंधिया

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में बुधवार देर रात तक चली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच बहस हो गई। यह सब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने हुआ। अब विवाद सुलझाने के लिए राहुल ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। गुरुवार को कांग्रेस की पहली सूची जारी होने की उम्मीद है।

दरअसल, प्रत्याशियों के चयन के लिए कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की ये तीसरी और आखिरी बैठक थी। बताया जा रहा है कि चुनाव समिति ने मामले को सुलझाने के लिए दोनों नेताओं के साथ रात 2:30 बजे तक बैठक की। दिग्विजय और सिंधिया के बीच जब सहमति नहीं बनी तो राहुल ने अशोक गहलोत, वीरप्पा मोइली और अहमद पटेल की एक नई समिति गठित कर दी। हालांकि, इस मसले पर वीरप्‍पा मोइली ने कहा कि मध्‍यप्रदेश में टिकटाें को लेकर कोई लड़ाई नहीं है। 

वायरल चिट्ठी का दिग्विजय ने किया खंडन: हाल ही में दिग्विजय सिंह के नाम से 27 अक्टूबर काे लिखा गया एक पत्र वायरल हो गया। इसमें पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को संबोधित किया गया है। इसमें लिखा गया है कि मैं 57 प्रबल दावेदारों के नाम पहुंचा रहा हूं, जिन्होंने सालों से केवल पार्टी के लिए काम किया। बाहर से आए अन्य नेताओं की जगह इन्हें मौका देना चाहिए। हालांकि, बुधवार को दिग्विजय ने ट्वीट कर बताया कि यह झूठ है। ऐसा पत्र उन्होंने कभी लिखा ही नहीं।

चीफ सिलेक्टर ने कहा था- ये धोनी के करियर का अंत नहीं
चीफ सिलेक्टर एमएसके प्रसाद ने ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 सीरीज चुने जाने के बाद साफ किया था कि इसे धोनी के टी-20 करियर का अंत नहीं माना जाए। टीम मैनेजमेंट विकेटकीपिंग के लिए मौजूद विकल्पों को मजबूत करना चाहता है। इसी वजह से छह टी-20 के लिए ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक को चुना गया है।’’

कोहली पांचवें वनडे में वेस्टइंडीज के नौ विकेट से हारने और भारत के सीरीज जीतने के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। उनसे धोनी को ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 सीरीज की टीम में नहीं चुने जाने के बारे में पूछा गया था। वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत में 4 नवंबर से और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में ही 21 नवंबर से टी-20 सीरीज खेली जाएगी। दोनों सीरीज के लिए बतौर विकेटकीपर ऋषभ पंत चुने गए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि धोनी को एकसाथ दो सीरीज के लिए नहीं चुना गया है।

धोनी आगे भी भारत के लिए वनडे खेलेंगे : कोहली
कोहली ने कहा, ‘‘इस बारे में सिलेक्टर्स खुद स्थिति साफ कर चुके हैं। हमें इसमें ज्यादा कयास नहीं लगाने चाहिए। धोनी भारत के लिए लगातार वनडे खेल रहे हैं और आगे भी खेलेंगे।’’ धोनी ने 2014 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था। इसके बाद से वनडे और टी-20 ही खेल रहे हैं।