Thursday, January 31, 2019

बजट 2019: वो पांच शब्दावली जिसे जाने बगैर बजट नहीं समझ पाएंगे

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल शुक्रवार को केंद्र की वर्तमान एनडीए सरकार का अंतिम बजट पेश करेंगे. वित्त मंत्री अरुण जेटली की तबीयत ख़राब होने की वजह से उनका कार्यभार संभाल रहे पीयूष गोयल ये बजट पेश करने जा रहे हैं.

इस साल आम चुनाव होने वाले हैं और यह बजट उस लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण समझा जा रहा है.

चर्चाएं यह भी हैं कि सरकार वोटरों को लुभाने के लिए परंपरा के विपरीत पूर्ण बजट पेश कर सकती है.

दरअसल हर चुनावी साल में केवल शुरुआती चार वित्तीय महीनों का बजट पेश किये जाने की परंपरा रही है, इसिलिए इसे अंतरिम बजट कहा जाता है.

नई सरकार के गठन के बाद बाकी वित्त वर्ष के लिए पूरक बजट पेश किया जाता है.

हर बजट पेश करने के दौरान कुछ ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल किया जाता है जिसे जाने बगैर आप बजट को अच्छी तरह नहीं समझ पायेंगे. ऐसे में बजट से जुड़े इन पांच शब्दों की आपको जानकारी होनी चाहिए.

सरकार की कुल सालाना आमदनी के मुक़ाबले जब ख़र्च अधिक होता है तो उसे राजकोषीय घाटा कहते हैं. इसमें कर्ज़ शामिल नहीं होता.

साल 2017 में बजट की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि साल 2017-18 में राजकोषीय घाटा कुल जीडीपी का 3.2 फ़ीसदी होगा. ये इसके पिछले वित्तीय वर्ष के लक्ष्य 3.5 फ़ीसदी से कम था.

हालांकि विशेषज्ञों की चिंता है कि ये लक्ष्य पूरा नहीं होगा और आने वाले वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा कम होने के बजाय बढ़ सकता है.

ऐसा अनुमान है कि बजट लोकलुभावन होगा जिसमें आने वाले चुनावों के लिहाज से मतदाताओं को लुभाने के लिए सरकार अधिक खर्च की घोषणा करेगी और टैक्स की सीमा में भी बदलाव कर सकती है.

वर्तमान में ढाई लाख रुपये तक की सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता है. इस सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने का अनुमान लगाया जा रहा है.

वहीं इनकम टैक्स की धारा 80 सी के तहत निवेश पर दी जाने वाली करमुक्त आय की सीमा को भी 1.5 लाख से बढ़ाकर तीन लाख किये जाने की संभावना जताई जा रही है.

सरकार इसका आधार यह बता सकती है कि आरक्षण के तहत आर्थिक रूप से कमज़ोर उन लोगों को माना जा रहा है जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपये हैं, ऐसे में इतनी ही कमाई करने वाले नौकरीपेशा लोगों को राहत मिलनी चाहिए.

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर

प्रत्यक्ष कर वो हैं जो देश के नागरिक सरकार को सीधे तौर पर देते हैं. ये टैक्स इनकम पर लगता है और किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता.

डायरेक्ट टैक्स में इनकम टैक्स, वेल्थ टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स आते हैं.

अप्रत्यक्ष कर वो हैं जो किसी भी व्यक्ति को ट्रांसफर किये जा सकते हैं जैसे किसी सर्विस प्रोवाइडर, प्रोडक्ट या सेवा पर लगने वाला टैक्स.

अप्रत्यक्ष कर का उदाहरण जीएसटी है जिसने वैट, सेल्स टैक्स, सर्विस टैक्स, लग्जरी टैक्स जैसे अलग-अलग टैक्स की जगह ले ली है.

भारत में वित्तीय वर्ष की शुरुआत एक अप्रैल से होती है और अगले साल के 31 मार्च तक चलता है. इस साल का बजट वित्तीय वर्ष 2019 के लिए होगा जो एक अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 तक के लिए होगा.

मौजूदा सरकार ने वित्तीय वर्ष के कैलेंडर बदलाव की बात कई बार कही है. सरकार वित्तीय वर्ष को जनवरी से दिसंबर तक करना चाहती है. हालांकि अब तक इसमें बदलाव नहीं हुआ.

शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म गेन

वर्तमान में कोई भी व्यक्ति यदि शेयर बाज़ार में एक साल से कम समय के लिए पैसे लगा कर लाभ कमाता है तो उसे अल्पकालिक (शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन) पूंजीगत लाभ कहते हैं. इस पर 15 फ़ीसदी तक टैक्स लगता है.

शेयरों में जो पैसा एक साल से अधिक समय के लिए होता है उसे दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन) कहते हैं. पहले इस आय पर टैक्स नहीं देने का प्रावधान था लेकिन वर्तमान सरकार ने 2018-19 के बजट में इस पर 10 फ़ीसदी टैक्स का प्रावधान किया है.

हालांकि, यह टैक्स सिर्फ़ 1 लाख रुपये से अधिक की कमाई पर ही देना होगा. एक लाख से कम की कमाई पर किसी तरह का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन नहीं लगाया गया है.

ऐसी संभावना जताई जा रही है कि सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटन गेन की समय सीमा में बदलाव कर सकती है.

Wednesday, January 23, 2019

近期两名75后市长履新 越来越多年轻干部进领导班子

中国共产党新闻网北京1月23日电 (任佳晖)1月19日,山东省烟台市第十七届人民代表大会举行第三次会议,会议补选1975年1月出生的陈飞为烟台市市长。此前,1月16日,出生于1975年11月的张晓强当选浙江省台州市市长。

  除陈飞、张晓强外,目前全国至少还有一名“75后”地级市市长,湖北省襄阳市市长郄英才。

从任职经历看,三名“75后”市长中,陈飞、张晓强是在本省成长起来的干部,郄英才有两次“中央空降”经历。

  陈飞是清华大学法学博士,曾在青岛、德州工作多年,历任青岛团市委书记,青岛市委常委、统战部部长,德州市委副书记、市长等职务。2018年12月,陈飞调任烟台市委副书记,今年1月任代理市长。

  张晓强曾任共青团庆元县委书记,共青团丽水市委书记,景宁县委副书记,遂昌县委副书记、县长,德清县委书记,绍兴市委常委、诸暨市委书记等职务。2018年2月,张晓强调任台州市委副书记、副市长、代市长。

  出生于1975年9月的郄英才曾在中共中央办公厅工作多年。2011年3月,郄英才“空降”湖北省黄石市,任市委常委、副市长。2012年2月,他回归中办,任秘书局会议处处长。2013年7月,时任中办秘书局副局长、巡视员兼会议处处长的郄英才再次“空降”湖北省,任随州市委副书记,副市长,并于次年任随州市市长。2017年11月,郄英才转任襄阳市委副书记、代市长,于2018年1月“去代转正”。

  近年来,越来越多年轻干部走进各级领导班子。除上述“75后”地市政府一把手,去年以来还有不少“70后”干部跻身省部级。

  2018年1月,费高云(1971年8月)升任江苏省副省长;6月,汪鸿雁(1970年4月)当选共青团中央书记处常务书记;8月,李波(1972年7月)当选中国侨联副主席;9月,刘强(1971年3月)履新山东省副省长,李云泽(1970年9月)履新四川省副省长;11月,郭宁宁(1970年7月)当选福建省副省长,杨晋柏(1973年4月)任广西壮族自治区政府副主席。

  习近平总书记在十九大报告中指出,要“大力发现储备年轻干部,注重在基层一线和困难艰苦的地方培养锻炼年轻干部,源源不断选拔使用经过实践考验的优秀年轻干部。”

  当前,中国特色社会主义进入新时代,发现培养选拔优秀年轻干部是国家“强基固本”之策。

  2018年6月29日,中共中央政治局召开会议,审议《关于适应新时代要求大力发现培养选拔优秀年轻干部的意见》。在随后召开的全国组织工作会议上,习近平总书记再次指出要做好新时代年轻干部工作,“实现中华民族伟大复兴,坚持和发展中国特色社会主义,关键在党,关键在人,归根到底在培养造就一代又一代可靠接班人。这是党和国家事业发展的百年大计。”

Monday, January 14, 2019

आपके फोन की ढेर सारी तस्वीरें, ई-मेल बन सकती हैं मुसीबत

लेकिन, क्या आप को पता है कि डिजिटल हो रही दुनिया में डिजिटल जमाख़ोरी भी हो रही है. ऐसा करने वालों को इसकी भारी क़ीमत भी चुकानी पड़ रही है.

फ़िलहाल, डिजिटल जमाख़ोरी को रोकने के लिए क़ानून तो नहीं हैं. लेकिन, ऐसा करने वाले अपने लिए मुसीबतों का ढेर लगा रहे हैं.

हो सकता है कि आप भी डिजिटल जमाख़ोरी कर रहे हों. चलिए इसका पता लगाते हैं.

क्या आप के मोबाइल में तस्वीरों का अंबार लगा है? क्या आप के पर्सनल और ऑफ़िशियल ई-मेल अकाउंट में हज़ारों मेल जमा हैं? क्या आप के पेन ड्राइव में ढेर सारे ग़ैरज़रूरी डॉक्यूमेंट सेव हैं?

आज हमारे मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर की स्टोरेज लगातार बढ़ती जा रही है. इसके अलावा तमाम कंपनियां अपनी क्लाउड स्टोरेज सुविधाएं मुफ़्त में या बेहद मामूली दर पर दे रही हैं.

नतीजा ये कि हम ज़रूरी डेटा के साथ-साथ हज़ारों ग़ैरज़रूरी 'बाइट्स' अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर में जमा करते जा रहे हैं. ई-मेल, फ़ोटो, डॉक्यूमेंट और दूसरे तरह की डिजिटल डेटा के पहाड़ हमें चारों तरफ़ से घेर चुके हैं.

आज दुनिया में ये डिजिटल जमाख़ोरी इस कदर बढ़ गई है कि अब ये बाक़ायदा रिसर्च का विषय बन गयी है.

हम अपने काम के दौरान या फिर निजी इस्तेमाल के दौरान तमाम ऐसे डेटा को जमा करते जा रहे हैं, जिनकी शायद हमें कभी ज़रूरत ही न पड़े.

पर, इस डिजिटल जमाख़ोरी के नतीजे ख़तरनाक हो सकते हैं. ये डिजिटल जमाख़ोरी हमें तनाव देती है. इससे घिरे हुए कई बार हम धुनते हैं.

हो सकता है कि दफ़्तर के ई-मेल में हज़ारों मेल देखकर आपका दिल अपने बाल नोचने का करता हो. हर रोज़ आप इस ढेर को साफ़ करने की सोच कर काम शुरू करते हैं, फिर मेल का ज़ख़ीरा देख कर आप इसे अगली बार पर टाल देते हों. ये ई-मेल और दूसरे डिजिटल डेटा का ढेर आपके लिए मुसीबत बनता जा रहा है.

आपकी दिमाग़ी सेहत पर असर डाल रहा है. बहुत से लोगों की आदत होती है कि काम होने के बाद भी मेल डिलीट नहीं करते.

डॉक्यूमेंट बचाकर रखते हैं. तस्वीरें सहेजते रहते हैं. इस उम्मीद में कि आगे चल शायद इनकी कभी ज़रूरत पड़े. नतीजा ये कि जब ज़रूरत पड़ती है, तो हम डिजिटल कचरे के ढेर के नीचे ख़ुद को दबाते जा रहे हैं.

डिजिटल जमाख़ोरी जुमले का इस्तेमाल सबसे पहले साल 2015 में एक रिसर्च पेपर में हुआ था. नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने वहां के एक आदमी के बारे में लिखा था कि वो हर रोज़ हज़ारों तस्वीरें खींचता था फिर घंटों उन तस्वीरों की प्रोसेसिंग का काम करता था.

अख़बार ने लिखा था कि, 'वो आदमी अपनी खींची तस्वीरों को दोबारा देखता भी नहीं था. लेकिन उसे ये लगता था कि भविष्य में ये तस्वीरें किसी न किसी काम ज़रूर आएंगी.'

डिजिटल जमाख़ोरी को कुछ इस तरह से परिभाषित किया गया है, 'डिजिटल फाइलों का ढेर इस कदर लगाते जाना कि उन्हें सहेजने का मक़सद ही कहीं गुम हो जाए.'

ये जमाख़ोरी का एक नया रूप है, जिसे मनोवैज्ञानिक बीमारी कहते हैं. नीदरलैंड में तस्वीरों की जमाख़ोरी करने वाला आदमी पहले तमाम ग़ैरज़रूरी सामानों का ढेर लगाकर रखे हुए थे.

ब्रिटेन की नॉरथम्ब्रिया यूनिवर्सिटी में डिजिटल जमाख़ोरी पर रिसर्च करने वाले निक नीव कहते हैं कि जैसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हम बेवजह की चीज़ों को हटाते नहीं, सहेज कर रखते रहते हैं, ठीक वैसा ही अब डिजिटल दुनिया में भी हो रहा है.

निक कहते हैं कि, 'जब आप असली जमाख़ोरों की बात करते हैं, तो लोगों को यही तो कहते हैं कि क्या बेवजह की चीज़ों का ढेर लगा रखा है. हटाओ सब. तो फ़ौरन वो जवाब देगा कि शायद आगे चल कर इस में से कुछ काम आ जाए. यही हाल ई-मेल का ढेर लगाने वालों का होता है.'

Monday, January 7, 2019

द‍ि एक्सीडेंटल प्राइमिन‍िस्टर: अनुपम खेर बोले- ऑस्कर भेजी जाए फिल्म

अनुपम खेर की फिल्म ट्रेलर र‍िलीज होने के बाद से ही व‍िवादों में है. संजय बारू की किताब पर बनी इस फिल्म के ट्रेलर को लेकर तमाम तरह के विवाद सामने आ रहे हैं. ट्रेलर पर बैन लगाने की भी मांग हुई है. दिल्ली हाईकोर्ट में एक याच‍िका दायर की गई है. इस बीच फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन स‍िंह का क‍िरदार न‍िभा रहे अनुपम खेर का कहना है कि इसे ऑस्कर में भेजना चाह‍िए.

अनुपम खेर ने हाल ही में एक एंटरटेनमेंट पोर्टल को द‍िए इंटरव्यू में अपने व‍िचार रखे. उन्होंने कहा, "कब तक हम भारत की गरीबी को बेचेंगे, भारत के पिछड़ेपन को, भारत के पिछड़े वर्ग, देश के हाथी या बंदरों को? ये एक ऐसी फिल्म है जो मॉडर्न भारत के राजनीति को दिखाती है. जिसे शानदार डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और एक्टर्स ने बनाया है. हमें ऐसी फिल्मों को ऑस्कर में भेजना चाहिए."

उधर, फिल्म पर उठे व‍िवाद पर अक्षय खन्ना का कहना है कि जिसे आप लोग व‍िवाद कह रहे हैं उसे मैं बहस का नाम दूंगा. सही मायनों में तो बहस होनी चाह‍िए. किसी नई चीज के आने पर अगर बहस नहीं होती है तो वो न‍िराश कर देने वाली बात है. उन्होंने कहा, "चाहे यह मामले के पक्ष में हो या इसके खिलाफ हो, बहस को स्वीकार किया जाना चाहिए. मैं इसकी सराहना करता हूं, क्योंकि यह तय करने का अधिकार लोगों का है कि ऐसी फिल्में बनाई जानी चाहिए या नहीं."

अक्षय ने कहा, "यह पहली फिल्म है, जो कि हालिया समय के नेताओं पर बनी है, उनके असली नाम हैं और सच्ची घटनाओं पर आधारित है. ये घटनाएं सार्वजनिक हैं और लोगों को इसके बारे में बखूबी पता है."

"बेशक, लोगों की अपनी राय होगी और वे सोशल मीडिया, मेनस्ट्रीम मीडिया या लेख लिखकर इसके बारे में खुद को व्यक्त कर सकते हैं."

बता दें कि फिल्म में दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर मनमोहन सिंह का किरदार निभा रहे हैं. अक्षय खन्ना, संजय बारू के किरदार में हैं, जिन्होंने 2004 से 2008 तक प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार के तौर पर काम किया था.

इस बीच सलमान खान ने कहा, "गंगाराम भी हमारे साथ ही बड़े हुए हैं. लेकिन इनसे पूछो तो ये मुझे भी नहीं पहचानते हैं."

गंगाराम की खास‍ियत भी है जिनका ज‍िक्र सलीम खान ने शो में किया. "पहली कि वो कहीं भी सो सकते हैं, बस जरा-सा खुद को ट‍िकाने की जगह मिल जाए. ये खड़े-खडे़ भी सो सकते हैं." गंगाराम से कप‍िल शर्मा ने पूछा कि आप मुझे जानते हैं? तो उन्होंने जो एक्सप्रेशन द‍िए वो देखकर दर्शक भी हंसी नहीं रोक सके. इस हंसी-मजाक से इतर सोहेल खान ने बताया कि गंगाराम के ज‍ितना ईमानदार इंसान कोई नहीं है.

सलमान खान का बड़ा राज, गणेश को मिली आवभगत से हैरान थे सलीम खान

वैसे गंगाराम की शो में एंट्री एक सवाल से हुई थी. जब कप‍िल शर्मा ने सलीम खान से पूछा कि एक अच्छे इंसान की पहचान क्या है. तब उन्होंने कहा, "देखो पहचान तो बहुत सी है, लेकिन मामूली सी बात मैं बताता हूं. ज‍िसका सबसे पुराना दोस्त हो और नौकर. वो शख्स अच्छा इंसान होगा."