एक पुरानी, लेकिन विश्वसनीय कहानी, के मुताबिक़ इस अवसर का जश्न मनाने के लिए एक अर्मेनियाई व्यापारी, ख्वाजा मोर्टिनिफस ने उन्हें तोहफे में ओपोर्टो की शराब की पांच बोतलें दीं.
सम्राट इस तोहफे से बेहद खुश हुए और व्यापारी से पूछा कि वापसी के तोहफे के रूप में उसे क्या चाहिए.
ख्वाजा ने कहा कि उनके पास ईश्वर की कृपा से वो सब कुछ है जो वो चाहते हैं और सम्राट ने पहले ही उन्हें अपने साम्राज्य में व्यापार करने की अनुमति दे दी है.
जहांगीर ने उनकी टिप्पणी के लिए आभार व्यक्त किया, फिर भी उन्हें तोहफा देने की पेशकश की.
जहांगीर ने तोहफे के रूप में उन्हें गोलकोण्डा के खदान से निकला एक बेशकीमती हीरा दिया.
व्यापारी ने वो हीरा अपने संरक्षक मिर्ज़ा ज़ुल्करनैन को उपहार में दे दिया, जिन्हें अकबर अपना सौतेला भाई मानते थे और जिन्हें सम्बर (राजपुताना) का प्रशासक नियुक्त किया था, जहां मुगलों का नमक बनाने का कारखाना था.
अर्मेनिया के इसाई मिर्ज़ा ने उस हीरे को सोने की एक अंगूठी में जड़वाया जिसे वो लगभग पूरी ज़िंदगी पहनते रहे.
संयोग से जहांगीर दिल्ली में शेरशाह के पुत्र सलीम शाह के बनाए सलीमगढ़ में रहते थे, क्योंकि उस समय लाल किला नहीं था. इस किले के अवशेष अब भी मौजूद हैं.
गर्मियों में वो यमुना नदी पर नावों के बने एक अस्थायी शिविर में रहना पसंद करते थे.
अर्मेनियाई ईसाईयों के दिल्ली में दो गिरजाघर थे (दोनों 1739 में नादिरशाह ने नष्ट कर दिये).
वो क्रिसमस के दौरान नाटक का आयोजन करते थे, जिसमें मुगल रईस और राजपूत सरदार प्रमुख आमंत्रित लोगों में हुआ करते थे.
उन्होंने 1625-26 के नाटक में सम्राट को आमंत्रित किया, जिसके लिए जहांगीर तैयार हो गए.
क्योंकि वो अपने पिता के समय से आगरा में आयोजित ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेते रहे थे.
फ्रांसिस्कन एनाल्स के रिकॉर्ड के मुताबिक, क्रिसमस की रात उस नाटक में परियों की वेषभूषा में छोटे बच्चों और बच्चियों ने भाग लिया. नाटक देखने के लिए आमंत्रित सम्राट पर गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा की गई.
इससे पहले, "क्रिसमस की सुबह वो अपने दरबारियों के साथ उस गुफा का नमूना देखने के लिए आए, जिसमें यीशु का जन्म हुआ था और जिसपर चरवाहों की नज़र पड़ी थी. बाद में उनके हरम की महिलाओं ने भी उस मंजीरे का दौरा किया".
एक बार जहांगीर ने लाहौर के चर्च में मोमबत्तियां का उपहार दिया, जिन्हें घंटियों की तरह सजाया गया, घंटियों की झंकार और कैरोल गीत हुए".
Tuesday, December 25, 2018
Wednesday, December 12, 2018
छत्तीसगढ़ के चावल वाले बाबा जो दाने-दाने वोट के लिए तरसे
इस चुनाव ने न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'अजेय' छवि को तोड़ा है बल्कि छत्तीसगढ़ में 2003 से सत्ता पर काबिज रहने वाले चावल वाले बाबा के रूप में मशहूर डॉ. रमन सिंह को भी बेदखल कर दिया है. इसका मतलब यह हुआ कि बीजेपी में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड बना चुके रमन सिंह का कभी अभेद्य लगने वाला किला ढह चुका है. राजनीति में सक्रिय होने से पहले अपनी डिस्पेंसरी में लोगों का इलाज करने वाले डॉक्टर रमन सिंह के लिए सत्ता से बाहर होने का यह पहला अनुभव है.
'दाने- दाने' वोट के लिए तरसे रमन
जनता को बेहद सस्ती दर पर चावल मुहैया कराने वाले रमन सिंह को सूबे में एक- एक वोट के लिए संघर्ष करना पड़ा. उनकी अगुवाई में बीजेपी की हार कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस से बीजेपी को 10 फीसदी कम वोट मिले. चुनावी गणित में इसे बड़ा अंतर माना जाता है. कांग्रेस को जहां 43 फीसदी तो बीजेपी को 33 पर्सेंट वोटों से संतोष करना पड़ा. कांग्रेस ने बीजेपी से करीब 14 लाख ज्यादा वोट हासिल किए. यह छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य के लिहाज से बड़ा आंकड़ा है.
कई सीटों पर तीसरे नंबर पर खिसका 'कमल'
तमाम सीटों पर बीजेपी न सिर्फ कांग्रेस से पीछे रही बल्कि वह बीएसपी जैसी पार्टियों से भी पिछड़ गई और तीसरे नंबर पर रही. 15 वर्षों तक सूबे में राज करने वाली बीजेपी के लिए यह बड़ा धक्का है.
8 मंत्री चुनाव हारे
जनता के गुस्से का निशाना बने बीजेपी के 8 मंत्री चुनाव हार गए. रमन सरकार के सिर्फ तीन मंत्री ही विधानसभा पहुंच पाए हैं. राजनांदगांव में रमन सिंह मुश्किल से जीत पाए. उनकी जीत का अंतर 17 हजार वोटों से भी कम रहा.
आदिवासी इलाकों में सूपड़ा साफ
छत्तीसगढ़ की 90 में से आदिवासी इलाकों में पड़ने वाली 29 सीटों पर बीजेपी का प्रदर्शन बहुत खराब रहा. सरगुजा और बस्तर संभाग की कुल 26 सीटों में बीजेपी को महज एक सीट मिली. बस्तर संभाग की 12 सीटों में बीजेपी को सिर्फ 1 सीट और सरगुजा संभाग की 14 सीटों पर तो बीजेपी का खाता भी नहीं खुल पाया.
'दाने- दाने' वोट के लिए तरसे रमन
जनता को बेहद सस्ती दर पर चावल मुहैया कराने वाले रमन सिंह को सूबे में एक- एक वोट के लिए संघर्ष करना पड़ा. उनकी अगुवाई में बीजेपी की हार कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस से बीजेपी को 10 फीसदी कम वोट मिले. चुनावी गणित में इसे बड़ा अंतर माना जाता है. कांग्रेस को जहां 43 फीसदी तो बीजेपी को 33 पर्सेंट वोटों से संतोष करना पड़ा. कांग्रेस ने बीजेपी से करीब 14 लाख ज्यादा वोट हासिल किए. यह छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य के लिहाज से बड़ा आंकड़ा है.
कई सीटों पर तीसरे नंबर पर खिसका 'कमल'
तमाम सीटों पर बीजेपी न सिर्फ कांग्रेस से पीछे रही बल्कि वह बीएसपी जैसी पार्टियों से भी पिछड़ गई और तीसरे नंबर पर रही. 15 वर्षों तक सूबे में राज करने वाली बीजेपी के लिए यह बड़ा धक्का है.
8 मंत्री चुनाव हारे
जनता के गुस्से का निशाना बने बीजेपी के 8 मंत्री चुनाव हार गए. रमन सरकार के सिर्फ तीन मंत्री ही विधानसभा पहुंच पाए हैं. राजनांदगांव में रमन सिंह मुश्किल से जीत पाए. उनकी जीत का अंतर 17 हजार वोटों से भी कम रहा.
आदिवासी इलाकों में सूपड़ा साफ
छत्तीसगढ़ की 90 में से आदिवासी इलाकों में पड़ने वाली 29 सीटों पर बीजेपी का प्रदर्शन बहुत खराब रहा. सरगुजा और बस्तर संभाग की कुल 26 सीटों में बीजेपी को महज एक सीट मिली. बस्तर संभाग की 12 सीटों में बीजेपी को सिर्फ 1 सीट और सरगुजा संभाग की 14 सीटों पर तो बीजेपी का खाता भी नहीं खुल पाया.
Friday, November 9, 2018
कर्नाटक में टीपू सुल्तान की जयंती मनाने की तैयारी में सरकार
बीजेपी के भारी विरोध के बाद भी कर्नाटक सरकार ने घोषणा की है कि वह इस वर्ष भी 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक ही मनाएगी। शनिवार को होने वाले इस कार्यक्रम के विरोध में बीजेपी और श्री राम सेना के समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं।
जहां एक ओर कर्नाटक सरकार शनिवार को मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती मनाने की तैयारी कर रही है, वहीं बीजेपी ने इसका बड़े स्तर पर विरोध शुरू कर दिया है। बीजेपी कार्यकर्ता और नेता तख्तियां लेकर बेंगलुरु में इस आयोजन के खिलाफ प्रदर्शन करने उतर चुके हैं। बता दें, कर्नाटक सरकार ने घोषणा की है कि वह बीजेपी के विरोध के बावजूद इस वर्ष भी 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक ही मनाएगी।
10 नवंबर को होने वाले इस कार्यक्रम के विरोध में बीजेपी और श्री राम सेना के समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं। बीजेपी ने मैसूर के शासक को अत्याचारी करार दिया है। केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने कहा है कि एक अत्याचारी के जन्मदिन को मनाए जाने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान हिंदू विरोधी थे। बीजेपी प्रवक्ता एस प्रकाश ने कहा कि जब पिछली कांग्रेस सरकार ने टीपू जयंती मनाने का फैसला किया था, उस समय उनका काफी विरोध हुआ था।
इससे पहले येदियुरप्पा ने भी इसका विरोध करते हुए कहा था, 'हम टीपू जयंती का विरोध कर रहे हैं और कोई इस आयोजन की तारीफ नहीं करेगा। लोगों के हित में राज्य सरकार को इसे रोकना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'टीपू जयंती मनाने के पीछे सरकार की मंशा केवल मुस्लिम समुदाय को संतुष्ट करने की है।' बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी ने आने वाले दिनों में इसके व्यापक विरोध का फैसला किया है।
राज्य की एचडी कुमारस्वामी सरकार ने गुपचुप तरीके से इस कार्यक्रम का स्थल विधानसौधा से हटाकर एक गैरराजनीतिक स्थान पर कर दिया है। विरोध को देखते कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वरा ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की है तथा कानून और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की है। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने चेतावनी दी है कि यदि किसी ने आधिकारिक कार्यक्रम में बाधा डाली तो उसे कानून का सामना करना होगा।
बेंगलुरु, आठ नवंबर (भाषा) अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा से मुकाबले के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे तेलुगूदेशम पार्टी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने गुरूवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी तथा पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा से मुलाकात की। भाजपा के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे नायडू ने दावा किया कि देश का मिजाज भाजपा नीत राजग के खिलाफ है और जल्द ही कई क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन बनाया जाएगा।
देवगौड़ा और कुमारस्वामी से मिलने के बाद नायडू ने संवाददाताओं से कहा कि गठबंधन बनाने के लिए शुरूआती कदम अभी तक तय नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के बाद कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। नायडू ने कहा, ‘‘मैंने मायावती, अखिलेश यादव से बातचीत की। मैंने सभी से मुलाकात की है। कल मैं द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन से मिलूंगा।
हम तय करेंगे कि आम-सहमति के साथ गठबंधन कैसे आगे ले जाया जाए। यह शुरूआती कवायद है। इसके बाद हम मिलकर काम करेंगे।’ कांग्रेस के मुखर आलोचक रहे नायडू महागठबंधन के लिए उसके साथ बातचीत करने के भी खिलाफ नहीं हैं। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री पद के दावेदार के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया।
जहां एक ओर कर्नाटक सरकार शनिवार को मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती मनाने की तैयारी कर रही है, वहीं बीजेपी ने इसका बड़े स्तर पर विरोध शुरू कर दिया है। बीजेपी कार्यकर्ता और नेता तख्तियां लेकर बेंगलुरु में इस आयोजन के खिलाफ प्रदर्शन करने उतर चुके हैं। बता दें, कर्नाटक सरकार ने घोषणा की है कि वह बीजेपी के विरोध के बावजूद इस वर्ष भी 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक ही मनाएगी।
10 नवंबर को होने वाले इस कार्यक्रम के विरोध में बीजेपी और श्री राम सेना के समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं। बीजेपी ने मैसूर के शासक को अत्याचारी करार दिया है। केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने कहा है कि एक अत्याचारी के जन्मदिन को मनाए जाने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान हिंदू विरोधी थे। बीजेपी प्रवक्ता एस प्रकाश ने कहा कि जब पिछली कांग्रेस सरकार ने टीपू जयंती मनाने का फैसला किया था, उस समय उनका काफी विरोध हुआ था।
इससे पहले येदियुरप्पा ने भी इसका विरोध करते हुए कहा था, 'हम टीपू जयंती का विरोध कर रहे हैं और कोई इस आयोजन की तारीफ नहीं करेगा। लोगों के हित में राज्य सरकार को इसे रोकना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'टीपू जयंती मनाने के पीछे सरकार की मंशा केवल मुस्लिम समुदाय को संतुष्ट करने की है।' बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी ने आने वाले दिनों में इसके व्यापक विरोध का फैसला किया है।
राज्य की एचडी कुमारस्वामी सरकार ने गुपचुप तरीके से इस कार्यक्रम का स्थल विधानसौधा से हटाकर एक गैरराजनीतिक स्थान पर कर दिया है। विरोध को देखते कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वरा ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की है तथा कानून और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की है। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने चेतावनी दी है कि यदि किसी ने आधिकारिक कार्यक्रम में बाधा डाली तो उसे कानून का सामना करना होगा।
बेंगलुरु, आठ नवंबर (भाषा) अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा से मुकाबले के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे तेलुगूदेशम पार्टी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने गुरूवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी तथा पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा से मुलाकात की। भाजपा के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे नायडू ने दावा किया कि देश का मिजाज भाजपा नीत राजग के खिलाफ है और जल्द ही कई क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन बनाया जाएगा।
देवगौड़ा और कुमारस्वामी से मिलने के बाद नायडू ने संवाददाताओं से कहा कि गठबंधन बनाने के लिए शुरूआती कदम अभी तक तय नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के बाद कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। नायडू ने कहा, ‘‘मैंने मायावती, अखिलेश यादव से बातचीत की। मैंने सभी से मुलाकात की है। कल मैं द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन से मिलूंगा।
हम तय करेंगे कि आम-सहमति के साथ गठबंधन कैसे आगे ले जाया जाए। यह शुरूआती कवायद है। इसके बाद हम मिलकर काम करेंगे।’ कांग्रेस के मुखर आलोचक रहे नायडू महागठबंधन के लिए उसके साथ बातचीत करने के भी खिलाफ नहीं हैं। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री पद के दावेदार के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया।
Thursday, November 1, 2018
टिकट बंटवारे पर राहुल के सामने भिड़े दिग्विजय-सिंधिया
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में बुधवार देर रात तक चली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच बहस हो गई। यह सब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने हुआ। अब विवाद सुलझाने के लिए राहुल ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। गुरुवार को कांग्रेस की पहली सूची जारी होने की उम्मीद है।
दरअसल, प्रत्याशियों के चयन के लिए कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की ये तीसरी और आखिरी बैठक थी। बताया जा रहा है कि चुनाव समिति ने मामले को सुलझाने के लिए दोनों नेताओं के साथ रात 2:30 बजे तक बैठक की। दिग्विजय और सिंधिया के बीच जब सहमति नहीं बनी तो राहुल ने अशोक गहलोत, वीरप्पा मोइली और अहमद पटेल की एक नई समिति गठित कर दी। हालांकि, इस मसले पर वीरप्पा मोइली ने कहा कि मध्यप्रदेश में टिकटाें को लेकर कोई लड़ाई नहीं है।
वायरल चिट्ठी का दिग्विजय ने किया खंडन: हाल ही में दिग्विजय सिंह के नाम से 27 अक्टूबर काे लिखा गया एक पत्र वायरल हो गया। इसमें पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को संबोधित किया गया है। इसमें लिखा गया है कि मैं 57 प्रबल दावेदारों के नाम पहुंचा रहा हूं, जिन्होंने सालों से केवल पार्टी के लिए काम किया। बाहर से आए अन्य नेताओं की जगह इन्हें मौका देना चाहिए। हालांकि, बुधवार को दिग्विजय ने ट्वीट कर बताया कि यह झूठ है। ऐसा पत्र उन्होंने कभी लिखा ही नहीं।
चीफ सिलेक्टर ने कहा था- ये धोनी के करियर का अंत नहीं
चीफ सिलेक्टर एमएसके प्रसाद ने ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 सीरीज चुने जाने के बाद साफ किया था कि इसे धोनी के टी-20 करियर का अंत नहीं माना जाए। टीम मैनेजमेंट विकेटकीपिंग के लिए मौजूद विकल्पों को मजबूत करना चाहता है। इसी वजह से छह टी-20 के लिए ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक को चुना गया है।’’
कोहली पांचवें वनडे में वेस्टइंडीज के नौ विकेट से हारने और भारत के सीरीज जीतने के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। उनसे धोनी को ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 सीरीज की टीम में नहीं चुने जाने के बारे में पूछा गया था। वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत में 4 नवंबर से और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में ही 21 नवंबर से टी-20 सीरीज खेली जाएगी। दोनों सीरीज के लिए बतौर विकेटकीपर ऋषभ पंत चुने गए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि धोनी को एकसाथ दो सीरीज के लिए नहीं चुना गया है।
धोनी आगे भी भारत के लिए वनडे खेलेंगे : कोहली
कोहली ने कहा, ‘‘इस बारे में सिलेक्टर्स खुद स्थिति साफ कर चुके हैं। हमें इसमें ज्यादा कयास नहीं लगाने चाहिए। धोनी भारत के लिए लगातार वनडे खेल रहे हैं और आगे भी खेलेंगे।’’ धोनी ने 2014 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था। इसके बाद से वनडे और टी-20 ही खेल रहे हैं।
दरअसल, प्रत्याशियों के चयन के लिए कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की ये तीसरी और आखिरी बैठक थी। बताया जा रहा है कि चुनाव समिति ने मामले को सुलझाने के लिए दोनों नेताओं के साथ रात 2:30 बजे तक बैठक की। दिग्विजय और सिंधिया के बीच जब सहमति नहीं बनी तो राहुल ने अशोक गहलोत, वीरप्पा मोइली और अहमद पटेल की एक नई समिति गठित कर दी। हालांकि, इस मसले पर वीरप्पा मोइली ने कहा कि मध्यप्रदेश में टिकटाें को लेकर कोई लड़ाई नहीं है।
वायरल चिट्ठी का दिग्विजय ने किया खंडन: हाल ही में दिग्विजय सिंह के नाम से 27 अक्टूबर काे लिखा गया एक पत्र वायरल हो गया। इसमें पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को संबोधित किया गया है। इसमें लिखा गया है कि मैं 57 प्रबल दावेदारों के नाम पहुंचा रहा हूं, जिन्होंने सालों से केवल पार्टी के लिए काम किया। बाहर से आए अन्य नेताओं की जगह इन्हें मौका देना चाहिए। हालांकि, बुधवार को दिग्विजय ने ट्वीट कर बताया कि यह झूठ है। ऐसा पत्र उन्होंने कभी लिखा ही नहीं।
चीफ सिलेक्टर ने कहा था- ये धोनी के करियर का अंत नहीं
चीफ सिलेक्टर एमएसके प्रसाद ने ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 सीरीज चुने जाने के बाद साफ किया था कि इसे धोनी के टी-20 करियर का अंत नहीं माना जाए। टीम मैनेजमेंट विकेटकीपिंग के लिए मौजूद विकल्पों को मजबूत करना चाहता है। इसी वजह से छह टी-20 के लिए ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक को चुना गया है।’’
कोहली पांचवें वनडे में वेस्टइंडीज के नौ विकेट से हारने और भारत के सीरीज जीतने के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। उनसे धोनी को ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 सीरीज की टीम में नहीं चुने जाने के बारे में पूछा गया था। वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत में 4 नवंबर से और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में ही 21 नवंबर से टी-20 सीरीज खेली जाएगी। दोनों सीरीज के लिए बतौर विकेटकीपर ऋषभ पंत चुने गए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि धोनी को एकसाथ दो सीरीज के लिए नहीं चुना गया है।
धोनी आगे भी भारत के लिए वनडे खेलेंगे : कोहली
कोहली ने कहा, ‘‘इस बारे में सिलेक्टर्स खुद स्थिति साफ कर चुके हैं। हमें इसमें ज्यादा कयास नहीं लगाने चाहिए। धोनी भारत के लिए लगातार वनडे खेल रहे हैं और आगे भी खेलेंगे।’’ धोनी ने 2014 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था। इसके बाद से वनडे और टी-20 ही खेल रहे हैं।
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