Tuesday, December 25, 2018

जब मुगल बादशाह जहांगीर ने दिया क्रिसमस का तोहफ़ा

एक पुरानी, लेकिन विश्वसनीय कहानी, के मुताबिक़ इस अवसर का जश्न मनाने के लिए एक अर्मेनियाई व्यापारी, ख्वाजा मोर्टिनिफस ने उन्हें तोहफे में ओपोर्टो की शराब की पांच बोतलें दीं.

सम्राट इस तोहफे से बेहद खुश हुए और व्यापारी से पूछा कि वापसी के तोहफे के रूप में उसे क्या चाहिए.

ख्वाजा ने कहा कि उनके पास ईश्वर की कृपा से वो सब कुछ है जो वो चाहते हैं और सम्राट ने पहले ही उन्हें अपने साम्राज्य में व्यापार करने की अनुमति दे दी है.

जहांगीर ने उनकी टिप्पणी के लिए आभार व्यक्त किया, फिर भी उन्हें तोहफा देने की पेशकश की.

जहांगीर ने तोहफे के रूप में उन्हें गोलकोण्डा के खदान से निकला एक बेशकीमती हीरा दिया.

व्यापारी ने वो हीरा अपने संरक्षक मिर्ज़ा ज़ुल्करनैन को उपहार में दे दिया, जिन्हें अकबर अपना सौतेला भाई मानते थे और जिन्हें सम्बर (राजपुताना) का प्रशासक नियुक्त किया था, जहां मुगलों का नमक बनाने का कारखाना था.

अर्मेनिया के इसाई मिर्ज़ा ने उस हीरे को सोने की एक अंगूठी में जड़वाया जिसे वो लगभग पूरी ज़िंदगी पहनते रहे.

संयोग से जहांगीर दिल्ली में शेरशाह के पुत्र सलीम शाह के बनाए सलीमगढ़ में रहते थे, क्योंकि उस समय लाल किला नहीं था. इस किले के अवशेष अब भी मौजूद हैं.

गर्मियों में वो यमुना नदी पर नावों के बने एक अस्थायी शिविर में रहना पसंद करते थे.

अर्मेनियाई ईसाईयों के दिल्ली में दो गिरजाघर थे (दोनों 1739 में नादिरशाह ने नष्ट कर दिये).

वो क्रिसमस के दौरान नाटक का आयोजन करते थे, जिसमें मुगल रईस और राजपूत सरदार प्रमुख आमंत्रित लोगों में हुआ करते थे.

उन्होंने 1625-26 के नाटक में सम्राट को आमंत्रित किया, जिसके लिए जहांगीर तैयार हो गए.

क्योंकि वो अपने पिता के समय से आगरा में आयोजित ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेते रहे थे.

फ्रांसिस्कन एनाल्स के रिकॉर्ड के मुताबिक, क्रिसमस की रात उस नाटक में परियों की वेषभूषा में छोटे बच्चों और बच्चियों ने भाग लिया. नाटक देखने के लिए आमंत्रित सम्राट पर गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा की गई.

इससे पहले, "क्रिसमस की सुबह वो अपने दरबारियों के साथ उस गुफा का नमूना देखने के लिए आए, जिसमें यीशु का जन्म हुआ था और जिसपर चरवाहों की नज़र पड़ी थी. बाद में उनके हरम की महिलाओं ने भी उस मंजीरे का दौरा किया".

एक बार जहांगीर ने लाहौर के चर्च में मोमबत्तियां का उपहार दिया, जिन्हें घंटियों की तरह सजाया गया, घंटियों की झंकार और कैरोल गीत हुए".

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